Tuesday, 9 August 2016

सूरजमुखी - Baabusha Kohli

माना कि तुम्हारी हथेली में पच्छिम नहीं है, एक लक़ीर अमावस की क्यूँ हरदम चलती रहती है ?

एक काम करोगी आज...

गहरे गले का ब्लाउज़ वो नीला वाला पहनो, जिस पर पीठ तुम्हारी आधे चाँद सी झिलमिल करती है| लम्बा-सा स्कर्ट वो पीला रेशम-रेशम, जिसकी हद पे सरसों की बाली फूला करती है| हरे रंग के कंगन पहनो, फ़ोन पे उनकी खन-खन भेजो | कानों में वो आगरा वाले लटकन पहनो, शाहजहाँ की बेतरतीब सी धड़कन पहनो | माँग में गीली शबनम पहनो, कमर में सारे मौसम पहनो |

कच्चा कोयला सीने में फिर से सुलगाओ, धुआँ-धुआँ काजल से तुम बादल बन जाओ | सिर के ऊपर कड़ी धूप है, मेरे शहर में बड़ी धूप है| हँसी की बूँदें छम छम भेजो , इन्द्रधनुष और सरगम भेजो|

जैसे लापरवाही से तुम बाल झटकती हो, हौले से बस! वैसे ही वो बात झटक दो |

ब्लाउज़ के नीचे काँच रंग की जो डोरी है, ज़रा-सा नीचे सरकाओ ? चटक -मटक रंगों में तुम नाखून डुबाओ | बायीं तरफ़ हँसली पर जानाँ, हँसते सूरजमुखी उगाओ |

जिस्म- जान सब रौशन-रौशन कर जाएगा, काँधे पे डूब के सूरज आज ही मर जाएगा |

[ सूरजमुखी ]

- Baabusha Kohli