Wednesday, 1 June 2016

यूँ ही की गई बातें #1

मेरा दिल एक जंगल की तरहा होता जा रहा है..
                     एक घना भयानक जंगल ।

 समझ सकता हूँ के घने भयानक जंगल वाली लाइन आप ने पहले भी सुनी होगी , पर क्या करे आख़िर दिल तो सब के पास होता है । 
इस जंगल में बहुत से जानवर भी हैं , मैं भी उन्हीं जानवर में से एक हूँ , फ़िल्हाल मेरा ख़ुद को जानवर कहना आप सब को अज़ीब लग सकता है पर मैं आप सब को यकीन दिलाना चाहूँगा के ज़ो जानवर मेरे भीतर है वो आप सभो के अन्दर भी पल रहा है , बेफिक्र शांत , पर पल रहा है ।

फिलहाल आप ये बात मानने के लीये तैयार नहीं हैं ,लेकिन यकीन मानीये आप को ये जाननें की ज़रूरत भी नहीं है ।
 आप कैद हैं उस जानवर के भीतर और जिस दिन आप अपने जानवर से रिह़ा होंगे तब आप जान जायेंगे की जिस जानवर से रिहा होने की जद्द्दो ज़हत में आप लगें हैं वो उतने ही फ़िज़ूल हैं जितने के आज कल के रिश्ते हैं। जी नहीं मैं आप के रिश्तों की बात नहीं कर रहा , हालांकि आप के रिश्ते भी उसी हवाई ज़हाज की तरहा हैं जिसका पायलट मर चूका है या सिर्फ बेहोश है , या हो सकता है वो अपने भीतर के जानवर की हराना चाहता हो ,

खैर छोड़िये फिलहाल आप अपने बनाए हुए जानवर पर ध्यान दीजिये । फिर भी एक बात बता दूँ के आप के रिश्ते कभी भी ज़मीन के अन्दर समां सकते हैं जैसे की वो हवाई ज़हाज जिसके ज़िक्र मैंने थोड़ी देर पहले किया था , अगर आप मेरी बात गौर से सुन रहे थे तो।
 फ़िक्र मत कीजिये मैं आप के रिश्तों के बारे में कुछ नहीं कहूँगा क्यूंकि अभी आप इस बात को समझने के लिए तैयार नहीं है । अब आप ये कह सकते है के आप कौन होते हैं ये बताने के लिए तो मैं आप को बात दूँ के आप मेरी ही कहानी का हिस्सा हैं जिसे मैं अपनी सुविधा अनुसार इस्तमाल कर कसता हूँ।

 याद रखिये भले ही आप अपने दिल के घने भयानक जंगल के जनवार हों पर आप को इस कहानी में लाने वाला मैं ही हूँ | 



                     ---------     ब्लॉग मालिक