Sunday, 25 September 2016

बेपनाह - मुक्ता

बेपनाह इश्क किया
बेपनाह इश्क लिखा |
कुछ ज़िन्दगी को तेरे साथ जिया
फिर ताउम्र उस साथ को जिया |
कभी तुझे याद किया
कभी खुद को बर्बाद किया |
किसी ने कहा ख़ूब लिखते हो
तुम हाल--दिल |
मैंने भी कह दिया
कुछ तो है ये उस बावफा का असर
अहसासे बयां करने का हुनर जो दिया |


                                     ------- मुक्ता भावसार