Friday, 16 September 2016

एक उलझन मेरी भी है - मुक्ता

सुना है तुम गणित पढ़ाते हो
लाभ - हानि , ब्याज़ - मूल
सबका पता लगाते हो
लेकर आते हैं लोग तुम्हारे पास उलझने
सुना है तुम उनका हल बताते हो

एक उलझन मेरी भी है !
क्या तुम सुलझा पाओगे ?
तुमसे मिलकर लाभ क्या हुआ
मुझसे बिछड़ कर कुछ हानि हुई क्या ?

तेरे साथ गुज़ारे लम्हों पर यादों का कितना प्रतिशत ब्याज़ लगा ?

मीलों के समय की क्या गति थी 
कितना तेरे साथ बीता
कितना रही तुझ से ज़ुदा ?

इन् सब बातों का मुझे तुम हिसाब बताओगे क्या !

     
                                     --- मुक्ता भावसार